Moral Short Stories

दुःख क्या है! – Short Moral Story In Hindi

duhkh-kya-hai-short-moral-story-in-hindi
Written by Abhishri vithalani

दुःख क्या है! – Short Moral Story In Hindi

खुशी और गम एक ही सिक्के के दो पहलू है और हर एक पहलू जिंदगी में दस्तक देता है। इस कहानी (दुःख क्या है! – Short Moral Story In Hindi) में यही बताया गया है।

एक खुशहाल परिवार, जिसमे माता – पिता, दादा और भाई – बहन थे। उन्हें अपनी खुशियों पर नाज था। एक दिन ऐसा आया, जब पिता ने साथ छोड़ दिया।

अपने बेटे के चले जाने से दादाजी को बेहद अफ़सोस था पर उन्होंने अपनी बहू और पोते – पोती के भविष्य को पहला स्थान दिया और अपने गमो को छोड़कर नयी राह पर चलने का जज्बा अपने घरवालों को दिया। लेकिन एक साल बाद ही उनके पोते कि एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई।

यह वक्त बहुत गंभीर था, पर इस वक्त में भी दादाजी और उनकी बहू ने संयम से काम लिया। घर कि बेटी कि ओर ध्यान देते हुए आगे बढे। समय के साथ ढलती उम्र के कारण दादाजी ने भी विदा ले लिया।

अब घर में बस माँ और उनकी बेटी रहे थे। एक खुशहाल परिवार बिखर गया था। अब बेटी बड़ी हो रही है, जिसके जीवन के अहम् फैसले उसके सामने है पर मन में उदासी और बेचैनी है।

महज 14 वर्ष की उम्र में पिता और फिर भाई को खो देने की तकलीफ है, पर हमेशा अपनी माँ की सीख पर जीवन में आगे बढ़ती रही। हमेशा एक हँसता हुआ चेहरा लिए ही उसने अपने जीवन को गले लगा रखा था।

एक दिन अकेलेपन के बाण टूट गए और उसने भरी हुई आँखों से अपनी माँ से पूछा – माँ, आप हमेशा कहती हो कि हमारी जिंदगी बहुत अच्छी है, दुनिया में बहुत तकलीफ है पर हमारे साथ ईश्वर है, लेकिन मुझे तो यह नहीं लगता है।

एक – एक करके सब चले गए। आज हमारे पास केवल उनकी यादे है और कुछ भी नहीं। तब माँ ने अपनी बेटी को जवाब दिया – बेटा! मै मानती हु कि तूने बहुत कम उम्र में अपने पिता और भाई को खो दिया, तुझे उनकी कमी महसूस होती है।

लेकिन बेटा तेरे पिता ने इस तरह की व्यवस्था की थी कि हमें कभी भी किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ा, न हमारे सर से छत हटी और न कभी तेरी परवरिश में कोई कमी आई। तेरे और मेरे नसीब में उन सबसे दूर जाना तय था, पर ईश्वर में विश्वास रखते हुए हमने हमेशा उसका आदर करके जिंदगी को गले लगाया।

उस कारण ही हमें इस दुःख को सहन करने कि ताकत मिली। अगर यह हिम्मत नहीं होती तो आज हमारी जिंदगी एक अभिशाप बन जाती।

Moral : खुशी और गम एक ही सिक्के के दो पहलू है और हर एक पहलू जिंदगी में दस्तक देता है। बस व्यक्ति को गम को बड़ा नहीं, बल्कि छोटा करके देखना चाहिए।

अगर आपको हमारी Story (दुःख क्या है! – Short Moral Story In Hindi) अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों के साथ भी Share कीजिये और Comment में जरूर बताइये की कैसी लगी हमारी Stories ।

About the author

Abhishri vithalani

I am a Hindi Blogger. I like to write stories in Hindi. I hope you will learn something by reading my blog, and your attitude toward living will also change.

Leave a Comment